*महाभारत के प्रसिद्ध मामा............* महाभारत में मामाओं के बड़े चर्चे रहे हैं। एक ओर मामाओं ने लुटिया डुबोई है तो दूसरी ओर पार लगाया है। महाभारत में जब मामाश्री की बात होती है तो सबसे पहले शकुनी का नाम ही सामने आता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की शकुनी के अलावा भी ऐसे कई मामा थे जिनकी महाभारत में चर्चा होती है। *पांच मामाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी...........* *कंस मामा.................* महाभारत और पुराणों में जरासंध की बहुत चर्चा होती है। वह उस काल के सबसे शक्तिशाली जनपद मगध का सम्राट था। जरासंध का दामाद था कंस जो भगवान श्रीकृष्ण के मामा था। कंस ने अपने पिता उग्रसेन को राजपद से हटाकर जेल में डाल दिया था और स्वयं शूरसेन जनपद का राजा बन बैठा था। शूरसेन जनपद के अंतर्गत ही मथुरा आता है। कंस के काका शूरसेन का मथुरा पर राज था। कंस ने मथुरा को भी अपने शासन के अधीन कर लिया था और वह प्रजा को अनेक प्रकार से पीड़ित करने लगा था। श्रीकृष्ण की बुआ के बेटे शिशुपाल का झुकाव भी कंस की ओर था। कंस अपने पूर्व जन्म में 'कालनेमि' नामक असुर था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। कंस के बारे में...
Posts
Showing posts from March, 2023
नंदी के कान में क्यों बोली जाती है मनोकामना ?
- Get link
- X
- Other Apps
नंदी के कान में क्यों बोली जाती है मनोकामना ? जब भी हम किसी शिव मंदिर जाते हैं तो अक्सर देखते हैं कि कुछ लोग शिवलिंग के सामने बैठे नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं। ये एक परंपरा बन गई है। इस परंपरा के पीछे की वजह एक मान्यता है। आज हम आपको उसी के बारे में बता रहे हैं, जो इस प्रकार है.. मान्यता है जहां भी शिव मंदिर होता है, वहां नंदी की स्थापना भी जरूर की जाती है क्योंकि नंदी भगवान शिव के परम भक्त हैं। जब भी कोई व्यक्ति शिव मंदिर में आता है तो वह नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहता है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव तपस्वी हैं और वे हमेशा समाधि में रहते हैं। ऐसे में उनकी समाधि और तपस्या में कोई विघ्न ना आए। इसलिए नंदी ही हमारी मनोकामना शिवजी तक पहुंचाते हैं। इसी मान्यता के चलते लोग नंदी को लोग अपनी मनोकामना कहते हैं। शिव के ही अवतार हैं नंदी शिलाद नाम के एक मुनि थे, जो ब्रह्मचारी थे। वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने उनसे संतान उत्पन्न करने को कहा। शिलाद मुनि ने संतान भगवान शिव की प्रसन्न कर अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने शिलाद मुनि को ये वरदान दे दिया। एक दिन जब ...
आज सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए करें ये उपाय
- Get link
- X
- Other Apps
रविवार का व्रत करने से पूरी होती है सभी मनोकामना रविवार के दिन सूर्यदेव की विशेष कृपा पाने के लिए व्रत आदि करें। किसी ग्रह की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए उससे संबंधित वस्तुओं का दान, जप तथा व्रत करने का विधान है। किसी ग्रह की शांति कराने या उसकी शुभता प्राप्त करने के लिए उससे संबंधित वार को व्रत किया जाता है। यदि किसी ग्रह की दशा, महादशा, अंतर्दशा, जन्मांक और गोचर अष्टक वर्ग में से कोई अनिष्टकारी हो तो उस ग्रह की शांति के लिए वार के अनुसार व्रत करने का विधान है। सप्ताह के प्रत्येक वार का काल सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक रहता है। रविवार का व्रत सूर्यदेव की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। सूर्य प्रकाश, आरोग्य, प्रतिष्ठा आदि देते हैं तथा अरिष्टों का निवारण भी करते हैं। नवग्रह शांति विधान में भी केवल सूर्योपासन से सभी ग्रह की शांति हो जाती है, क्योंकि ये नवग्रहों के राजा हैं। इस हेतु माह वैशाख, मार्गशीर्ष- और माघ श्रेष्ठ हैं। उक्त में से किसी भी माह के प्रथम रविवार (शुक्ल पक्ष) से इस व्रत को संकल्प लेकर प्रारंभ करना चाहिए। यह व्रत एक वर्ष अथवा 12 या 30 रविवार तक करें। रविवार व्रत ...
रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर धनुष क्यों नहीं उठा पाया और श्री राम ने कैसे धनुष तोड़ दिया ?
- Get link
- X
- Other Apps
रावण ने कैलाश पर्वत को उठा लिया फिर धनुष क्यों नहीं उठा पाया और श्री राम ने कैसे धनुष तोड़ दिया ?* ऐसा था धनुष : भगवान शिव का धनुष बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारिक था। शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो।यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था।इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। इस धनुष का नाम पिनाक था।देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवराज इन्द्र को सौंप दिया गया था। देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवराज को दे दिया।राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवराज थे।शिव-धनुष उन्हीं की धरोहरस्वरूप राजा जनक के पास सुरक्षित था।उनके इस विशालकाय धनुष को कोई भी उठाने की क्षमता नहीं रखता था, लेकिन भगवान राम ने इसे उठाकर इसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और इसे एक झटके में तोड़ दिया। श्रीराम चरितमानस में एक चौपाई आती है:- *"उठहु राम भंजहु भव चापा।* *मेटहु तात जनक परितापाI"* भावार्थ- गुरु विश्वामित्र जनकजी को बेहद परेशान और निराश देखकर श्...
शनि चंद्रमा का विष योग का प्रभाव।
- Get link
- X
- Other Apps
शनि चंद्रमा का विष योग का प्रभाव। कुंडली में बनने वाला ये योग जीवनभर अशुभ फल प्रदान करता है. इस योग के बारे में कहा जाता है कि जब कुंडली में ये योग मौजूद हो तो ऐसा व्यक्ति यदि पालतु श्वान को भी यदि रोटी खिलाए तो भी उसे एक न एक दिन काट ही लेता है . इस योग का सबसे अशुभ फल यही है कि ऐसा व्यक्ति मित्र, सगे संबंधियों से ठगा जाता है. इनसे धोखा पाता है. विष योग में व्यक्ति अपने सभी कामों को बहुत ही गंभीरता से करता है. जिस कारण उसे सफलता भी मिलती है. होने पर आप शिव रात्रि पर कुछ उपाय कर सकते हैं। अपनी कुंडली के अनुसार हर भाव में अलग अलग प्रभाव पड़ता है। जैसे मैं पहले भी बता चुकी हूं जन्मकुंडली हमारे शरीर के अंगों से संबंधित है अंग पर शुभ प्रभाव मानना चाहिए भाव और भावेश निर्मल होने से उसके क्रूर ग्रहों की स्थिति या उस पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि होने से शरीर का संबंधित भाग रोग ग्रस्त होता है हर घर का अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। और उसी के अनुसार आपके लिए उपाय भी बताए जाएंगे। चंद्र और शनि किसी भी भाव में इकट्ठा बैठे हो तो विष योग बनता है। गोचर में जब शनि चंद्र के ऊपर से या जब चंद्र शनि के ऊपर से निकलत...
नवरात्रों में व्रत करें या न करें ?
- Get link
- X
- Other Apps
🚩🤔 *नवरात्रों में व्रत करें या न करें ?* 🤔🚩 भारत में शक्तिपूजन की कई विधाएँ है, जो श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था के आधार पर निर्मित की हैं। इनमें से एक है, आदिशक्ति के पूजन -दिवस यानी नवरात्रों में किए जाने वाले व्रत! 'व्रत' का सामान्य अर्थ है- संकल्प या दृढ़ निश्चय। नवरात्रों के नौ दिनों में वत का मतलब है- तामसिक राजसिक, को त्यागकर सात्विक आहार-विहार-व्यवहार, अपनाकर आदि-शक्ति की आराधना का सकल्प। चूँकि शक्तिपूजन का अवसर वर्ष में दो बार आता है,इसलिए यह सोचन का विषय है कि क्यों इन्हीं दिनों में अन्न त्याग कर फलाहार या अन्य सात्विक खाद्य पदार्थों को ग्रहण किया जाता है? पहली नवरात्रि चैत्र मास में तथा दूसरी अश्विन मास में आती है। ये दोनों वे बेलाएँ हैं, जब दो ऋतुओं का संधिकाल होता है। यानी जब एक ऋतु जाती है और दूसरी ऋतु शुरु होती है। ऋतुओं के संधिकाल में बीमारियां होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि संधिकाल के दौरान संयमपूर्वक व्रतों को अपनाया जाए, तो इससे बहुत सी बीमारियों से बचाव होता है। यह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बहुत ज़रूरी है। पर चूकि भारतीय लोग। धार्मिक प्रवृ...
कृष्ण पक्ष (हिन्दू काल गणना)
- Get link
- X
- Other Apps
कृष्ण पक्ष (हिन्दू काल गणना)* 🌔 सनातनी (हिन्दू) काल गणना के अनुसार एक मास को दो पक्षो में विभक्त किया गया है, इनमें से एक पूर्णिमा एवं अमावस्या के बीच के चरण को कृष्ण पक्ष माना गया है आख्यानों के अनुसार द्वापर युग में इसी पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण भी अवतरित हुए थे कृष्ण पक्ष की रात्रि शुक्ल के अपेक्षाकृत अधिक अंधेरी होती है जिसके पीछे का मूल कारण चंद्रमा की घटती हुई कलाएं हैं इस दौरान चंद्रमा की शक्ति क्षीण होने से ज्योतिषीय गणनाओं में सामान्यतः इसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है पूर्णिमा के अगले दिन से प्रारंभ होने वाले कृष्ण पक्ष के दौरान दरअसल चंद्रमा का आकार एवं प्रकाश दोनों ही क्षीण होने लगते है अमावस्या की रात कृष्ण पक्ष के अंतर्गत सबसे अधिक अंधेरी रात होती है जिसके अगले दिन से चंद्रमा के आकार एवं प्रकाश दोनों में बढ़ोत्तरी देखी जाती है
पंचक क्यों लगता है, क्या होता है असर
- Get link
- X
- Other Apps
पंचक क्यों लगता है, क्या होता है असर ********************************* हिन्दू पंचांग अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिनका अलग ही महत्व होता है जिन्हें पंचक कहा जाता है। प्रत्येक माह का पंचक अलग अलग होता है तो किसी माह में शुभ कार्य नहीं किया जाता है तो किसी माह में किया जाता है। पंचक क्यों लगता है? ==================== ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। अर्थात पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पंचक' कहा जाता है। पंचक के नक्षत्रों का प्रभाव:- =================== 'अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः। संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।'-मुहूर्त-चिंतामणि अर्थात:- पंचक में तिनकों और काष्ठों के संग्रह से अग्निभय, चोरभय, रोगभय, राजभय एवं ध...
भगवान सूर्य कैसे आए मां के गर्भ में और कैसे हुआ उनका जन्म .
- Get link
- X
- Other Apps
भगवान सूर्य कैसे आए मां के गर्भ में और कैसे हुआ उनका जन्म . दैत्य अक्सर देवताओं पर आक्रमण करते थे। एक बार भयानक युद्ध हुआ और वर्षों तक चला। उस युद्ध में सृष्टि का अस्तित्व संकट में पड़ गया। पराजित होकर देवगण वन-वन भटकने लगे। उनकी व्यथा लेकर देवर्षि नारद कश्यप मुनि के आश्रम में पहुंचे और संकट के बारे में बताया।नारद ने सलाह दी कि इस संकट से सूर्य के समान तेजस्वी और बलशाली सत्ता ही मुक्ति दिला सकती है। वह यदि देवों का प्रतिनिधित्व करे, तो बात बने। लेकिन सूर्य प्रकट रूप में एक महाविराट अग्निपिंड है, उसे मनुष्य के रूप में जन्म लेकर देवशक्तियों का सेनापतित्व करना चाहिए।ऐसी तेजस्वी संतान कोई तेजस्वी स्त्री ही जन्म दे सकती है। बहुत सोच-विचार और खोज-पड़ताल के बाद उन्होंने कहा कि इसके लिए महर्षि कश्यप की पत्नी और देवमाता अदिति ही सूर्य की मां बन सकती हैं।देवमाता अदिति से अनुरोध किया गया। वह राजी हो गईं। तप, त्याग और ध्यान से अदिति ने भगवान सूर्यदेव को मनाया और उन्हें पुत्र रूप में जन्म लेने के लिए मनाया। तथास्तु कहकर सूर्य भगवान अंतर्धान हो गए।कुछ दिन बाद सूर्य अदिति के गर्भ में आ गए। समय आने प...
कर्मफल का सिद्धांत
- Get link
- X
- Other Apps
कर्मफल का सिद्धांत ▪️ "पूर्व जन्म", "वर्तमान जन्म" और "पुनर्जन्म" के सिद्धांत को हमें मानना ही होगा । कर्म फल भोगने की धारणा पर अटूट विश्वास भी रखना होगा । हमारा कोई भी कर्म निष्फल नहीं होता । देर-सवेर उसका फल हमें मिलता ही है । हम किसी को गाली दें, तो वह हमें थप्पड़ मार कर तुरंत बदला लेता है, यहाँ कर्म का फल तुरंत मिल गया । कुछ उल्टा सीधा खा पी लें, तो उसका फल कुछ दिनों बाद या वर्षों बाद शरीर में रोग के रूप में फूटता है । इसी प्रकार कुछ कर्मों का फल इसी जीवन में मिल जाता है, जबकि कुछ का अगले जन्म में । भगवान के यहाँ देर है पर अंधेर नहीं । ▪️ भगवान को हम किसी भी नाम से पुकारें, उसे निराकार माने या साकार, पर यह तो मानना ही होगा कि सब कुछ उसी की कृपा से होता है । ईशावस्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्यां जगत् -इस संसार में जो कुछ भी है, कण-कण, में रोम-रोम में, ईश्वर का वास है । वही सारे संसार का नियंता है, नियामक है । हम सारे संसार को भले ही धोखा दे लें, पर भगवान को धोखा नहीं दे सकते । हमारे कर्मों का फल तो हमें अवश्य ही भोगना पड़ेगा । ▪️ हमारे जीवन में जो भी अच्छी...
भगवान के अवतारों के भेद-
- Get link
- X
- Other Apps
. #भगवान के अवतारों के भेद- भगवान के अवतारों के मुख्यतः छःभेद है-: 1) पुरुषावतार-: महा विष्णु के अवतार रूप में यह संकर्षण के अंशावतार हैं जो अपने भ्रुकुटी विन्यास से प्रकृति कोविक्षुब्ध कर महतत्व आदि द्वारा इस प्रपंचात्मक विश्व की सृष्टि करते हैं। 2) गुणावतार-: जो सत्व गुण द्वारा विश्व के पालक विष्णु स्वरूप है उन्हीं के द्वारा रजोगुणात्मक सृष्टि कारक ब्रह्मा तथा तमोगुणात्मक सृष्टि संघाहरक शिव की उत्पत्ति है 3) मन्वंतरावतार- यह 14 प्रकार के हैं।।ब्रह्मा के 1 दिन में 14 मन्वंतर होते हैं एवं प्रत्येक मन्वंतर में 1-1 अवतार होते हैं 4) शक्त्यावेशावतार-: इसके आवेश, प्रभाव, वैभव तथा परावस्थ भेद है ईस में उत्तरोत्तर अधिक शक्ति एवं प्रकाशक रूप में अवतारों की श्रेष्ठता है 5) युगावतार-: सत्य, त्रेता, द्वापर एवं कलयुग इन चार युगों में भगवान युगावतार रूप में अवतीर्ण होते हैं सतयुग में भगवान शुक्ल वर्ण जटा वक्कल वस्त्र धारी मृग चर्म यज्ञोपवीत अक्षमाला तथा दंड कमंडलु धारण कर अवतरित होते हैं त्रेतायुग मे भगवान रक्त वर्ण चतुर्भुज त्रिगुण मेखला धारक सुनहरे केश...
दांत खराब है ? गभराइये मत इन पेड़ों की दातुन कीजिये
- Get link
- X
- Other Apps
दांत खराब है ? गभराइये मत इन पेड़ों की दातुन कीजिये महर्षि वाग्भट के अष्टांगहृदयम में दातून के बारे में बताया गया है। वे कहते हैं कि दातुन कीजिये | दातुन कैसा ? तो जो स्वाद में कसाय हो। कसाय मतलब कड़वा और नीम का दातुन कड़वा ही होता है और इसीलिए उन्होंने नीम के दातुन की बड़ाई (प्रसंशा) की है। उन्होंने नीम से भी अच्छा एक दूसरा दातुन बताया है, वो है मदार का, उसके बाद अन्य दातुन के बारे में उन्होंने बताया है जिसमे बबूल , अर्जुन, आम , अमरुद जामुन,महुआ,करंज,बरगद,अपामार्ग,बेर,शीशम,बांस इत्यादि है। ऐसे 12 वृक्षों का नाम उन्होंने बताया है जिनके दातुन आप कर सकते हैं। चैत्र माह से शुरू कर के गर्मी भर नीम, मदार या बबूल का दातुन करने के लिए उन्होंने बताया है, सर्दियों में उन्होंने अमरुद या जामुन का दातुन करने को बताया है, बरसात के लिए उन्होंने आम या अर्जुन का दातुन करने को बताया है। आप चाहें तो साल भर नीम का दातुन इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन उसमे ध्यान इस बात का रखे कि तीन महीने लगातार करने के बाद इस नीम के दातुन को कुछ दिन का विश्राम दें। इस अवधि में मंजन कर ले। दन्त मंजन बनाने की आसान विधि उन्...
मृत्यु के बाद क्या होता है ?
- Get link
- X
- Other Apps
श्रीमदभगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को गीता का ज्ञान दे रहे हैं,,, अर्जुन पूछता है – हे त्रिलोकीनाथ! आप आवागमन अर्थात पुनर्जन्म के बारे में कह रहे हैं, इस सम्बन्ध में मेरा ज्ञान पूर्ण नहीं है। यदि आप पुनर्जन्म की व्याख्या करें तो कृपा होगी। कृष्ण बताते हैं – इस सृष्टि के प्राणियों को मृत्यु के पश्चात् अपने-अपने कर्मों के अनुसार पहले तो उन्हें परलोक में जाकर कुछ समय बिताना होता है जहाँ वो पिछले जन्मों में किये हुए पुण्यकर्मों अथवा पापकर्म का फल भोगते हैं। फिर जब उनके पुण्यों और पापों के अनुसार सुख दुःख को भोगने का हिसाब खत्म हो जाता है तब वो इस मृत्युलोक में फिर से जन्म लेते हैं। इस मृत्युलोक को कर्मलोक भी कहा जाता है। क्योंकि इसी लोक में प्राणी को वो कर्म करने का अधिकार है जिससे उसकी प्रारब्ध बनती है। अर्जुन पूछते हैं – हे केशव! हमारी धरती को मृत्युलोक क्यों कहा जाता है? कृष्ण बताते हैं – क्योंकि हे अर्जुन, केवल इसी धरती पर ही प्राणी जन्म और मृत्यु की पीड़ा सहते हैं। अर्जुन पूछता है – अर्थात दूसरे लोकों में प्राणी का जन्म और मृत्यु नहीं होती? कृष्ण बताते हैं – न...
नवग्रहों का महिलाओं के जीवन पर पड़ता है विशेष प्रभाव
- Get link
- X
- Other Apps
नवग्रहों का महिलाओं के जीवन पर पड़ता है विशेष प्रभाव ************************************ शुभ सूर्य ======== अगर किसी महिला कि कुंडली में सूर्य अच्छा हो तो वह हमेशा अग्रणी ही रहती है और निष्पक्ष न्याय में विश्वास करती है चाहे वो शिक्षित हो या नहीं पर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देती है। अशुभ सूर्य ========= जब यही सूर्य उसकी कुंडली में नीच का हो या दूषित हो जाये तो महिला अपने दिल पर एक बोझ सा लिए फिरती है। अन्दर से कभी भी खुश नहीं रहती और आस -पास का माहौल भी तनाव पूर्ण बनाये रखती है। जो घटना अभी घटी ही ना हो उसके लिए पहले ही परेशान हो कर दूसरों को भी परेशान किये रहती है। बात-बात पर शिकायतें, उलाहने उसकी जुबान पर तो रहते ही हैं, धीरे -धीरे दिल पर बोझ लिए वह एक दिन रक्त चाप की मरीज बन जाती है और न केवल वह बल्कि उसके साथ रहने वाले भी इस बीमारी के शिकार हो जाते है। दूषित सूर्य वाली महिलायें अपनी ही मर्जी से दुनिया को चलाने में यकीन रखती हैं सिर्फ अपने नजरिये को ही सही मानती हैं दूसरा चाहे कितना ही सही हो उसे विश्वास नहीं होगा। सूर्य का आत्मा से सीधा सम्बन्ध होने के कारण यह अगर दूषित या न...
सुबह उठ कर भूमि-वंदन क्यों करना चाहिए?
- Get link
- X
- Other Apps
सुबह उठ कर भूमि-वंदन क्यों करना चाहिए? शास्त्रों में मनुष्य को प्रात:काल उठने के बाद धरती माता की वंदना करके ही भूमि पर पैर रखने का विधान किया गया है। पहले दायें पैर को भूमि पर रख कर हाथ से पृथ्वी का स्पर्श कर फिर मस्तक पर लगाया जाता है, साथ ही पांव रखने के लिए विष्णुपत्नी भूदेवी से क्षमा मांगी जाती है—‘हे धरती माता ! मुझे तुम्हारे ऊपर पैर रखने में बहुत संकोच होता है, तुम तो मेरे भगवान की शक्ति हो।’ भूमि-वंदना का मंत्र इस प्रकार है— समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते । विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ।। अर्थात्–समुद्ररूपी वस्त्रों को धारण करने वाली, पर्वतरूपी स्तनों से शोभित विष्णुपत्नी, मेरे द्वारा होने वाले पाद स्पर्श के लिए आप मुझे क्षमा करें। भगवान नारायण श्रीदेवी और भूदेवी (पृथ्वी) के पति हैं। भूदेवी कश्यप ऋषि की पुत्री हैं और पुराणों में इनका एक देवी रूप है। भूदेवी अपने एक रूप से संसार में सब जगह फैली हुईं हैं और दूसरे रूप में देवी रूप में स्थित रहती हैं। कश्यप ऋषि की पुत्री होने से ये ‘काश्यपी’, स्थिर रूप होने से ‘स्थिरा’, विश्व को धारण करने से ‘विश्वम्भरा’, अनंत...
कारगार उपाय विभिन्न समस्याओं से निजात पाने के लिए
- Get link
- X
- Other Apps
कारगार उपाय विभिन्न समस्याओं से निजात पाने के लिए 1=रात को नीद अच्छे से नही आती हो तो बिना जोड़ वाली स्टील की अंगूठी धारण करे , मोती या चन्द्रमणि भी लाभदायक होती है 2=शुगर के कारण परेशानी हो तो 7 रति का सफेद मूंगा+पीला पुखराज मध्यम और तर्जनी में धारण करे 3=आप को यह लगे की किसी ने कुछ आप पर कर दिया है तो 3 से 5 किलो पालक मंगलवार को साय काल को ले आये और बुधवार को बाहर गाय को खिलाने के लिए डाले, यदि गाय वो खाये ना सूंघ कर छोड़ दे ते आप पर अवश्य ही कुछ किया होता है तो आप उपाय करें , एक गिलास ले उसमे आधा पानी और आधा दूध डाले और और उसमें थोड़ा कपूर भी मिलाए , इस गिलास को 3 वार घुमा कर पीपल के पेड़ में डाले 3 शनिवार को लाभ होता है 4=जायदाद पूरी कीमत पर बेचने के लिए , उड़द चलते पानी मे बहाये , शनिवार को , लोहे की चीजो का दान करे , बादाम लोगो मे बांटे , 5=बवासीर से परेशानी हो तो मूंगा + नीलम तर्जनी उंगली में धारण करे , 6=यदि किसी भी तरह से विमारी दूर ना होती हो तो मरीज के बजन जितने जौ चलते पानी मे बहाये , 7=चने की दाल लगातर 43 दिन धर्मस्थान में दान करे ,...