कैसे बनता है कालसर्प दोष? जानिए 12 प्रकार, लक्षण और ज्योतिषीय उपाय
कैसे बनता है कालसर्प दोष? जानिए 12 प्रकार, लक्षण और ज्योतिषीय उपाय वैदिक ज्योतिष में कालसर्प योग या कालसर्प दोष को लेकर अनेक मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिष की विभिन्न परंपराओं में इसकी परिभाषा और प्रभावों को अलग-अलग तरीके से समझाया जाता है। सामान्य ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब जन्म कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सात प्रमुख ग्रह स्थित होते हैं , तब कालसर्प योग बनने की बात कही जाती है। हालांकि, सभी ज्योतिष विद्वान कालसर्प दोष को समान रूप से स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जन्म कुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है। 🐍 कैसे बनता है कालसर्प योग? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे के आमने-सामने यानी 180 डिग्री पर स्थित रहते हैं। जब सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि सभी राहु और केतु के बीच एक ओर स्थित हों, तो कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में इसे कालसर्प योग कहा जाता है। इसके प्रभाव का आकलन करते समय केवल राहु-केतु की स्थिति नहीं, बल्कि— लग्न ग्रहों की शक्ति शुभ एवं अशुभ दृष्टियां ग्रहों की दशा और अंत...